Tuesday, April 17, 2018

शिवना साहित्यिकी का अप्रैल-जून 2018 अंक

मित्रों, संरक्षक एवं सलाहकार संपादक, सुधा ओम ढींगरा Sudha Om Dhingra , प्रबंध संपादक नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy , संपादक पंकज सुबीर Pankaj Subeerr , कार्यकारी संपादक, शहरयार Shaharyar , सह संपादक पारुल सिंह Parul Singh के संपादन में शिवना साहित्यिकी का अप्रैल-जून 2018 अंक अब ऑनलाइन उपलब्धl है। इस अंक में शामिल है- आवरण कविता - पारुल सिंह Parul Singh। संपादकीय / शहरयार। व्यंग्य चित्र / काजल कुमार Kajal Kumar। स्मरण - सुशील सिद्धार्थ Sushil Siddharth /अशोक मिश्र Ashok Mishraa । जो पिछले दिनों पढ़ा... हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज गौतम राजऋषि , गूदड़ बस्ती Pragya Rohini , अभी तुम इश्क़ में और हसीनाबाद Geeta Shree , सुधा ओम ढींगरा। विमर्श - फ़ेक एनकाउंटर / प्रेम जनमेजय, अपूर्व जोशी Apoorva Joshi । पेपर से पर्दे तक... कृष्णकांत पण्ड्या Krishna Kant Pandya । फिल्म समीक्षा के बहाने- निमकी मुखिया / वीरेन्द्र जैन Virendra Jain। पुस्तक-आलोचना- हंसा आएगी ज़रूर / डॉ. सीमा शर्मा । पुस्तक चर्चा - चम्बल में सत्संग / अशोक अंजुम Ashok Anjum । तेरी हँसी -कृष्ण विवर सी / पूनम सिन्हा ‘‘श्रेयसी’’ Punam Sinha । हैप्पीनेस ए न्यू मॉडल ऑफ ह्यूमन बिहेवियर / तरुण कुमार पिथोड़े Tarun Pithode Mukesh Dubey , टुकड़ा टुकड़ा इन्द्रधनुष / आशा शर्मा, निब के चीरे से / ओम नागर Om Nagar , पुरवाई/ कृष्णा अग्निहोत्री Krishna Agnihotri , तुम्हारे जाने के बाद / कृष्णकांत निलोसे Krishnakant Nilosey Dr Prakash DrPrakash Hindustanii । समीक्षा- चित्रा देसाई Chitra Desai / ज़िंदगी का क्या किया / धीरेन्द्र अस्थाना Dhirendra Asthana , जवाहर चौधरी Jawahar Choudhary / स्वप्नदर्शी / अश्विनी कुमार दुबे , सुषमा मुनीन्द्र @sushma munindra / तपते जेठ में गुलमोहर जैसा / सपना सिंह, घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ Ghanshyam Maithil Amrit / ढाक के तीन पात / मलय जैन Maloy Jain , राजेश्वरी @rajeshwari / अच्छा, तो फिर ठीक है/ कामेश्वर Kameshwar Pandey , रेणु / मन कितना वीतरागी / पंकज त्रिवेदी Pankaj Trivedi Pankaj Trivedi , डॉ. नितिन सेठी / 51 किताबें ग़ज़लों की / नीरज गोस्वामी Neeraj Goswamy , पारुल सिंह Parul Singh / बात फूलों की / सर्वजीत सर्व , गोविन्दप्रसाद बहुगुणा / हाईवे E 47/ अर्चना पैन्यूली Archana Painuly । यात्रा संस्मरण- पधारो म्हारे देस ...../ राजश्री मिश्रा Rajshree Mishra । रपट- भारत भवन/ प्रवीण पाण्डेय Praveen Pandey , नाटक / प्रज्ञा Pragya Rohini । आवरण चित्र राजेंद्र शर्मा Babbal Guru , डिज़ायनिंग सनी गोस्वामी Sunny Goswami । आपकी प्रतिक्रियाओं का संपादक मंडल को इंतज़ार रहेगा। पत्रिका का प्रिंट संस्करण भी समय पर आपके हाथों में होगा। ऑन लाइन पढ़ें-

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